ग्रे मार्केट ने निकाला ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने का तोड़, यूज हो रहे हैं ये तरीके

ब्लैक मनी
नई दिल्ली. मोदी सरकार ने 500 और 1,000 रुपए के नोट बंद करने का फैसला काले धन रखने वालों पर लगाम लगाने के लिए किया है। लेकिन सरकार की इस कवायद का ग्रे मार्केट ने तोड़ निकाल लिया है। वह कई तरीकों से काले धन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। moneybhaskar.com आपको बता रहा है मोदी सरकार की मुहिम पर ग्रे मार्केट ने ब्लैक को व्हाइट बदलने के क्या तरीके निकाल लिए हैं।
क्या है ग्रे मार्केट
ग्रे मार्केट वह मार्केट है जो गैरकानूनी, अनौपचारिक तरीके से बिना ब्लैक मनी को व्हाइट बनाने का काम करते हैं। ब्लैक मार्केट का काम करने का तरीका गैरकानूनी माना जाता है। वह उन तरीकों से काम करते हैं जिसे कानून मान्यता नहीं देता।
क्या ढूंढ निकाले हैं ग्रे मार्केट ने तरीके..
पेट्रोल पंप का हो रहा है इस्तेमाल
moneybhaskar.com ने जब ग्रे मार्केट के लोगों से बात कि तो पता चला कि पेट्रोल पंप पर कारोबारी ब्लैक को व्हाइट में कन्वर्ट कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि पेट्रोल पंप लाखों की संख्या में 500 और 1,000 रुपए के नोट ले रहे हैं। वह कुछ दिन या एक महीने बाद 2,000 या नए नोट देने का वादा कर रहे हैं। पेट्रोल पंप मालिकों से संबंध होने पर ये काम आसान है लेकिन पेट्रोल पंप ब्लैक को व्हाइट में कन्वर्ट करने के लिए 5 फीसदी तक चार्ज भी ले रहे हैं।
ग्रे मार्केट ब्लैक को कर रहा व्हाइट
ग्रे मार्केट के सूत्रो ने बताया कि ग्रे मार्केट करोड़ों रुपए को चार्ज लेकर व्हाइट में कन्वर्ट कर रहा है। ग्रे मार्केट में ब्लैक मनी पर 25 फीसदी काटकर व्हाइट में पैसे दे रहे हैं। ये नोट बदलकर और अकाउंट में भी ट्रांसफर भी कर रहे हैं। सूत्र ने बताया कि ब्लैक को व्हाइट में कन्वर्ट करने का काम चार्टेड अकाउंट कर रहे हैं।
- कुल अमाउंट का 25 फीसदी ब्लैक मार्केट ले रहा है चार्ज
ज्वैलर्स कर रहे हैं ब्लैक को व्हाइट
दिल्ली के कुचामहाजनी में एक ज्वैलर्स ने नाम न लिखने की शर्त पर moneybhaskar.com को बताया कि ज्वैलर्स ब्लैक को व्हाइट में कन्वर्ट करने का काम कर रहे हैं। ज्वैलर्स ज्वैलरी खरीद पर पक्का बिल बनाकर वैट ले रहे हैं लेकिन वह बिल बैक डेट का बना रहे हैं। ज्वैलर्स 500 और 1,000 रुपए के नोट ले रहे हैं। शादी के सीजन में वह बढ़ी सेल को सरकार को आसानी से बता सकते हैं। ऐसा करके लोग ब्लैक को व्हाइट में बदल रहे हैं।
- बैक डेट पर बना रहे हैं बिल ताकि शादी के सीजन में सरकार भी इन पर शक न कर सके।
को-ऑपरेटिव बैंक कर रहे हैं एफडी
पीटीआई की एक खबर के मुतबिक रूरल एरिया में को-ऑपरेटिव बैंक बैक डेट में जाकर फिक्स्ड डिपोजिट कर रहे हैं। वह ऐसा कर कैश को व्हाइट में कन्वर्ट कर रहे हैं। मोदी सरकार के फैसले से पहले की डेट में जाकर एफडी करने से सरकार भी सवाल नहीं उठा सकती। ऐसे को-ऑपरेटिव बैंक को नेता सीधे तौर पर कंट्रोल करते हैं। हालांकि, इस तरीके पर सरकार नजर रखे हुए है।
फाइनेंस मिनिस्टर अरूण जेटली
देश में इतनी है ब्लैक मनी
फाइनेंस मिनिस्ट्री के ब्लैक मनी पर आए व्हाइट पेपर के मुताबिक सरकार के ब्लैक मनी पर कराए आखिरी सर्वे के मुताबिक देश में कुल जीडीपी का 18 फीसदी ब्लैक मनी है। यह करीब 36,784 करोड़ रुपए है। इसके अलावा स्विस बैंक में साल 2010 में 9,295 करोड़ रुपए की ब्लैक मनी है। देश में सबसे ज्यादा ब्लैक मनी माइनिंग, फॉरेस्ट, शराब कारोबार में होती है। इसके अलावा अकाउंट में गलत आंकड़ें दिखाकर सबसे ज्यादा टैक्स चोरी होती है।
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