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Thursday, March 30, 2017

क्यों हुए आज दोपहिया वाहनो के दाम कम??? By imran memon

         1 अप्रैल 2017 से देशभर में भारत स्टेज BS-III व्‍हीकल्‍स न तो बिकेंगे और न ही उनका रजिस्ट्रेशन होगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह ऑर्डर दिया। ऑटो मैन्‍युफैक्‍चरर्स ने बीएस-III व्‍हीकल्‍स की बिक्री में एक साल की छूट देने के लिए पिटीशन लगाई थी। कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक, कंपनियों के पास इस वक्त BS-III के बगैर बिके करीब 8.2 लाख व्हीकल्स हैं। बता दें कि BS-III के पुराने व्हीकल्स को बेचने पर रोक नहीं है। आप पर्सन-टु-पर्सन उसे बेच सकते हैं।  दो कंपनियों पर होगा ज्यादा असर...

 

- जस्टिस एमबी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा, "जिन व्हीकल्स में BS-IV एमिशन नॉर्म नहीं है, वे एक अप्रैल से नहीं बिकेंगी। ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चरर्स के कमर्शियल इंटरेस्ट से ज्यादा जरूरी लोगों की हेल्थ है।"

- BS-IV एमिशन स्टेंडर्ड वाले व्हीकल्स एक अप्रैल से चालू हो जाएंगे।

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के क्या हैं मायने?

- मेरी गाड़ी तो आज डिलीवर होनी है। तो क्या उसका रजिस्ट्रेशन नहीं होगा? 
- फैसला 1 अप्रैल से लागू होगा। 31 मार्च तक अगर गाड़ी की बिलिंग हुई है तो रजिस्ट्रेशन करवाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। 

 

- क्या मैं अपनी बीएस-3 गाड़ी को सड़क पर नहीं निकाल पाऊंगा? 
- बिल्कुल निकाल पाएंगे। रोक गाड़ी बेचने और रजिस्ट्रेशन पर है। पहले से खरीदी गाड़ी पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। 

 

- मैं अपनी पुरानी बीएस-3 गाड़ी बेचने वाला था। क्या अब नहीं बिकेगी? 
- पर्सन-टु-पर्सन आप उसे बेच सकते हैं। क्योंकि पहले से उसका रजिस्ट्रेशन हो चुका है। 

SIAM ने कोर्ट से क्या कहा था?
- सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चरर्स (SIAM) ने जनवरी 2016 से बीएस-III व्हीकल्स की मैन्युफेक्चरिंग और सेल के बारे में बताया था।
- SIAM ने कोर्ट से कहा, कंपनियों के पास बीएस-3 नॉर्म की 8.24 लाख गाड़ियां हैं। मैन्युफेक्चरर्स ने कोर्ट से ये कहा भी कहा था कि जब तक नई टेक्नोलॉजी नहीं आ जाती, उन्हें पुराने नॉर्म्स वाले व्हीकल्स बेचने की परमिशन होनी चाहिए।

 

बिना बिके बीएस-III व्हीकल्स (20 मार्च 2017 तक)

व्हीकल्स कैटेगरीकुल तादादकमर्शि‍यल व्‍हीकल्‍स96,724टू-व्‍हीलर्स6,71,308थ्री व्‍हीलर्स40,048कार16,198

  

क्‍या है मामला?
- एन्‍वायरन्मेंट पॉल्‍यूशन कंट्रोल अथॉरिटी (ईपीसीए) ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी कि सिर्फ बीएस-4 स्‍टैंडर्ड वाले व्‍हीकल्‍स को ही बेचने की मंजूरी मिलनी चाहिए। 
- इसके खिलाफ ऑटो कंपनियों ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ऑटो कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट से बीएस-III इन्‍वेंटरी की बिक्री के लिए एक साल की मोहलत मांगी थी। 

 

सरकार ने खर्च कि‍ए 18 हजार से 20 हजार करोड़
- ईपीसीए की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट हरीश साल्‍वे के मुताबिक, ऑटोमोबाइल कंपनि‍यों को पता है कि‍ बीएस-IV नॉर्म्‍स 1 अप्रैल से शुरू होने वाला है, लेकि‍न वह पुरानी टेक्‍नोलॉजी के साथ व्‍हीकल्‍स को बना रही हैं। 
- उनका कहना था कि सरकार क्‍लीनर फ्यूल बनाने के लि‍ए 18 हजार से 20 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। ऐसे में बीएस-III व्‍हीकल्‍स को बेचने और बनाने पर बैन लगना चाहि‍ए।

 

भारत स्टेज (बीएस) क्या है?

- व्हीकल्स में फ्यूल से होने वाले पॉल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए एक स्टैंडर्ड तय किया जाता है। इसे इमिशन नॉर्म्स कहते हैं। 
- जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी में बदलाव आता है और एक्सपेरिमेंट्स के जरिए पॉल्युशन कम करने के तरीके तलाशे जाते हैं, जिसके साथ इमिशन नॉर्म्स भी बदलते हैं। 
- इन नॉर्म्स के तहत व्हीकल्स तैयार करना हर कंपनी के लिए जरूरी होता है, ताकि इससे एयर पॉल्यूशन कम किया जा सके। नए स्टैंडर्ड के तहत फ्यूल भी बदला जाता है। 

- अभी भारत में बीएस-IV स्टैंडर्ड चल रहा है। इसे यूरो-IV भी कहा जाता है।

- भारत सरकार ने तय किया है कि वह बीएस-V को छोड़कर सीधे बीएस-VI स्टैंडर्ड लागू करेगी। इसके 2020 तक लागू होने की उम्मीद है।

 

बीएस-4 वाले फ्यूल का फायदा 

- यह कार्बन मोनो ऑक्साइड को 56% कम कर देगा। इस गैस से सरदर्द और उल्टी की शिकायत होती है। 
- फ्यूल जलने से निकलने वाले हाइड्रोकॉर्बन से सिर दर्द की शिकायत होती है। बीएस-4 इसके असर को 50% कम कर देगा।
- पार्टिकुलेट मैटर फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। नया मानक इसका असर 80% कम कर देगा। 
- नाइट्रोजन से खांसी होती है, आंखों पर असर होता है। बीएस-4 से यह असर 47% तक कम हो जाएगा।

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